भारत का सर्वप्रथम बूमरैंग एसोसिएशन : आई बि ऐ

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 23 जनवरी इंडो-बूमरैंग एसोसिएशन ने आज भारत के प्रतिष्ठित प्रेस क्लब में अपना पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया, जिसमें जाने-माने समाचार-पत्रों, संवाददाताओं, चैनलों के साथ-साथ यूट्यूब और सोशल मीडिया के लोगों ने भी हिस्सा लिया।इस आयोजन में इसके संस्थापक अध्यक्ष श्री विवेक मौन्ट्रोज़ के साथ उपाध्यक्ष एस. दिनेश कुमार, महासचिव कार्तिक राजा, कोषाध्यक्ष श्रीमती परमप्रीत कौर, सचिव डॉ. असित साहनी और इसके कार्यकारी सदस्य संभव सिंह श्याम के साथ बूमरैंग के इतिहास और इसका हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ संबंधों के विवरण द्वारा चिह्नित किया गया। दुनिया के कई देशों में खेले जाने वाले खेल के रूप में बूमरैंग की वर्तमान स्थिति का एक विस्तृत परिदृश्य देते हुए सदस्यों ने मीडिया और लोगों को अवगत कराया कि बौरडेओ, फ्रांस में अगस्त 2020 में आगामी डब्ल्यूबीसी (वर्ल्ड बूमरैंग चैम्पियनशिप) में प्रतिनिधित्व करने के लिए टीम इंडिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है।बीएए के अध्यक्ष और आईएफबीए के कार्यकारी सदस्य श्री रोजर पेरी ने इस अवसर पर एक विशेष संदेश में संगठन को इसकी सफल शुरुआत के लिए बधाई दी और साथ ही 20 से अधिक वर्षों के श्री विवेक के प्रयासों की प्रशंसा की, जो संघ को अस्तित्व में लाए, तथा भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।बूमरैंग्स का तथ्यात्मक विवरण देते हुए विवेक जी बताया कि आज के आधुनिक बूमरैंग खेल उपकरण हैं और उन्हें क्रिकेट, टेनिस या बेसबॉल के समान सम्मान के साथ माना जाना चाहिए। सभी खेल, जैसे बूमरैंग, लापरवाह होने पर खतरनाक हो सकते हैं। जब सही तरीके से उपयोग किया जाता है तो वे सुरक्षित और मजेदार होते हैं।बूमरैंग का खेल दुनिया के कई देशों में खेला जाता है, आईएफबीए (इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ बूमरैंग एसोसिएशन), दुनिया भर में खेल के लिए शासी निकाय है जो जर्मनी में स्थित है, जो और डब्ल्यूबीसी- वर्ल्ड बूमरैंग चैम्पियनशिप हर 2 साल में आयोजित करती है।श्री विवेक मौन्ट्रोज़ भारत के पहले बूमरैंग फेंकने वाले भी हैं, जिन्होंने 15 साल की उम्र में 1991 में अपने गुरु ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी केन कोलबुंग के मार्गदर्शन में शुरुआत की थी, और पहली बार 1994 में ऑस्ट्रेलिया में खेले। 1995 और 96 में केन कोलबंग के साथ भोपाल के म्यूजिय़म ऑफ मैन प्रदर्शनी में भाग लिया और 1997 में सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे द्वारा भी लिखा गया था। तब से वह यहां जागरूकता पैदा करने और खेल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं, और आखिरकार 2019 अप्रैल में ऑस्ट्रेलिया में बीएएए राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद इस संगठन की शुरुआत करने में सफल रहे। उन्हें आदिवासियों ने स्नेहपूर्वक “जीन्स वाला मोगली” शीर्षक दिया है। आईएफ़बीए के साथ एसोसिएशन को पंजीकृत करने के लिए प्रयास जारी हैं। चूँकि इस खेल को अभी भी भारत में मान्यता नहीं मिली है, इसलिए उनका उद्देश्य यह है कि इसे मान्यता और यहां खेले जाने वाले खेल का दर्जा दिया जाए और राष्ट्र का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया जाए। खेल में कई तकनीकी और भौतिक पहलू शामिल हैं, जिनका विवरण हमारे कार्यालय से मेल या समाचार पत्र के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।