बिना दहेज 21 लोगों की बारात के साथ विधायक नयनपाल रावत ने की भतीजे की शादी

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : शादी-ब्याहों में लाखों-करोड़ों रूपए खर्च करके समाज में अपनी वाहवाही बटोरने वाले लोगों के समक्ष हरियाणा भंडारण निगम के चेयरमैन एवं पृथला क्षेत्र के विधायक नयनपाल रावत ने अपने भतीजे की बिना दहेज शादी करके एक नई मिसाल कायम करते हुए मात्र एक रुपए में रिश्ता कर दहेज प्रथा के खिलाफ समाज को एक नया संदेश देने का कार्य किया है। अपने पैतृक गांव असावटी में विधायक नयनपाल रावत ने अपने भतीजे की घुड़चढ़ी पर न केवल दूल्हे को अपने हाथों से मास्क पहनाया बल्कि 21 लोगों की बारात लेकर शादी के लिए रवाना हुए। इस मौके पर विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि वह तीन भाई है और सभी के एक-एक बेटा है और उन्होंने शुरू से ही मन बना लिया था कि वह उनकी शादियों में किसी प्रकार की फिजूलखर्ची या दहेज नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भतीजे की शादी बिना किसी दिखावे व बिना दहेज के सम्पन्न करवाई ताकि लोग चाहे वह लडक़ी वाले हो या लडक़ा वाले अपनी जमीनें जायदादें गिरवी रखकर अपनी शान दिखाने के लिए शादियों में फिजूलखर्ची करते है, वह जागरूक हो और सादगीपूर्वक बिना दहेज अपने बच्चों का विवाह सम्पन्न करें। उन्होंने कहा कि बेटी से बड़ा कोई धन नहीं है दहेज की जो यह प्रथा चली आ रही है, उसको हमें मिलकर खत्म करना चाहिए और आज उन्होंने अपने भतीजे की शादी के जरिए लोगों को बिना दहेज के ही शादी करने का संदेश देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा लोगों से जो शादी समारोह में अपील की गई है कोरोनावायरस लेकर उसका लोग पालन करें ताकि यह महामारी हमारी खुशियों के आड़े न आए। उन्होंने समाज की सभी छत्तीस बिरादरियों के लोगों से शादियों में फिजूलखर्ची न करने की अपील करते हुए कोरोना काल में अपना व अपने परिवार को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। वहीं विधायक नयनपाल रावत के बड़े भाई वह दूल्हे के पिता शीशपाल रावत ने कहा कि लोग दोहरी मानसिकता का त्याग करें और वे स्वयं किसी के शादी के कार्ड भी नहीं स्वीकार करते और उन्होंने इसके लिए एक सूचना पट्ट भी अपने घर पर लगाया हुआ है क्योंकि वह नहीं चाहते कि हमारे हिंदू देवी देवताओं का किसी तरह अपमान हो क्योंकि समारोह के बाद निमंत्रण कार्डाे को इधर-उधर फेंक दिया जाता है, जिससे हमारे देवी देवताओं और हिंदू धर्म का अपमान होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दहेज जैसी कुरीतियों को दूर करने में सहायक साबित हो और बहू को भी अपनी बेटी समझे।