फरीदाबाद की मोनिका शर्मा रसोई के कूड़े से उन्नत किस्म की प्राकृतिक खाद बनाती है

0
243

Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 7 फरवरी। रसोई के कूड़े को ना फेंककर इसका उपयोग खाद बनाने में किया जाए तो पेड़-पौधों को बेहतरीन किस्म की जैविक खाद मिल सकती है।
फरीदाबाद की रहने वाली स्वच्छताकर्मी मोनिका शर्मा गत पांच वर्षों से सब्जियों, फलों व फूलों के कचरे से उन्नत किस्म की प्राकृतिक खाद ना केवल बनाती है, बल्कि इसको बनाने का तरीका भी लोगों को समझा रही है। मोनिका ने बताया कि वह सफाई के प्रति काफी संवेदनशील रहती थी और घर या रसोई में पड़ा कूड़ा उसे बेचैन कर देता था। फिर किसी ने उसको समझाया कि शिकायत करने की बजाय इसका समाधान निकाला जाए। धीरे-धीरे उसे अपने मिशन में कामयाबी मिलती चली गई। अब वह मिट्टी के घड़ों का इस कार्य में उपयोग कर रही है। मोनिका ने बताया कि इन मिट्टी के बर्तनों को वह खासतौर पर हैदराबाद और राजस्थान के जोधपुर से मंगवाती हैं। मोनिका के साथ ही आर.डी. शर्मा ग्रेटर नौएडा स्थित अपने प्लांट में प्लास्टिक कचरे से सुंदर टाइलें बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए स्टार्ट अप प्रोग्राम से जुडक़र राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला से उन्होंने इसकी स्वीकृति हासिल की। मोनिका ने बताया कि वह गोबर से सूखी ज्वलनशील लकडिय़ां भी बना रही हैं। इनका  ईंधन में बाखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके साथ मानव, संदीप नागपाल, पारस सलूजा भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
बॉक्स:
एनजीओ ह्यूमन काइंड फाउंडेशन की संचालिका मोनिका शर्मा ने बताया कि मिट्टी के तीन या दो घड़ों का प्राकृतिक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। फलों, सब्जियों की  कचरा सामग्री को लकड़ी के बुरादे व सूखे पत्तों से ढक़ दिया जाता है। इसमें बैक्टिरिया छोड़े जाते हैं। दस-बारह दिन में ही जैविक खाद बन कर तैयार हो जाती है। मोनिका गुड़ और आटे से डिस्पोजल प्लेट कटोरी भी बनाती हैं, जिसको प्रयोग करने के बाद पशु या चींटियों को खिलाया जा सकता है।