अंखड भारत परशुराम यात्रा का किया गया भव्य स्वागत

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : विश्व ब्राहण महापरिषद व बह्र परशुराम अखाड़ा द्वारा आचार्य राजेश्वर जी के नेतृत्व में अंखड भारत परशुराम यात्रा का आज बल्लभगढ़ के कैली गांव स्थित खाटू श्याम जी के मंदिर में श्याम सेवा परिवार के सदस्यों जिसमें मधु सूदन माटोलिया,विमल खंडेलवाल, रवि शर्मा(इनसो जिला चेयरमेन),हरीराम शर्मा ,दुर्गादत्त शर्मा, प्रेम डीडवानिया, सुरेंद्र चोटिया, आनंद रिनिवा ,महेश शर्मा, गोपाल बदानी ,रवि शर्मा ,सत्यप्रकाश रिनिवा ,प0जेठमल इन्दोरिया ,ब्रिज बिहारी त्रिवेदी ,पवन शर्मा, मनीष अत्रि,जवाहर बदानी ,यादव, मनोज खंडेलवाल द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर आचार्य राजेश्वर जी ने बताया कि इस यात्रा का प्रांरभ तीन साल पहले राज्स्थान के लोहागढ़ से हुआ था और यह यात्रा राजस्थान,गुजरात,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश होते हुए हरियाणा पहुंची। उन्होनें बताया कि इस यात्रा में वह लगभग 10 लाख लोगों से मिले। उन्होनें बताया कि इस यात्रा का मु य उदेश्य बाह्रणों को संगठित करना है तथा उन्हें अच्छे कामों में बढ़ चढ़कर भाग लेना है। उन्होंनें बताया कि भगवान परशुराम ने हमेशा ही अन्याय व अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई तथा समाज को जीने की राह दिखाई। भगवान परशुराम जी ने आतातायीयों व अधर्मियों का नाश कर समाज में शांति की स्थापना की। उन्हीं के दिखाए हुए रास्ते तथा उनकी शिक्षाओं को अंगीकार करते हुए हमें भी समाज में धार्मिक कार्यो को बढ़ावा देते हुए समाज में चंहु और शांति का वातावरण बनें,भाईचारा कायम हो व मध्य समाज का निर्माण हो सकें। इस अवसर पर श्याम सेवा परिवार के सदस्य एवं इनसो जिला चेयरमेन रवि शर्मा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी जाति या धर्म के आधार पर नहीं बल्कि अपने कर्मो के आधार पर समाज में उच्च स्थान प्राप्त करता है। उन्होनें कहा कि इसी प्रकार भगवान परशुराम भी ब्राहण समाज के साथ साथ सकल समाज के प्रेणता तथा पथ प्रदर्शक थे इसलिए हम सभी को उनके दिखाए हुए रास्तों का अनुसरण करते हुए धार्मिक व सामाजिक कार्या में बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी करनी चाहिए। इस मौके पर विमल खण्डेलवाल व मधु सूदन माटोलिया ने आचार्य राजेश्वर जी फरीदाबाद पधारने पर धन्यवाद किया और उन्हें आश्चासन दिया कि जो भी जि मेवारी श्याम सेवा परिवार के सदस्यों को सौंपी जाएगी उसे वो सच्चे मन से पूरा करेगें और कोशिश करेगें कि सर्वसमाज को साथ लेकर चल सकें।