बल्लभगढ़ में बनाया जाएगा राजा नाहर सिंह का भव्य स्मारक : सत्यवीर डागर

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : ऐतिहासिक नगरी बल्लभगढ़ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद एवं बल्लभगढ़ शहर के राजा नाहर सिंह का एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा, जहां पर महाराजा नाहर सिंह की 26 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उक्त फैसला आज राजा नाहर सिंह बलिदान दिवस पर प्रगतिशील किसान मंच के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सत्यवीर डागर द्वारा आयोजित समारोह में लिया गया। इस समारोह में हरियाणा के परिवहन मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा ने सत्यवीर डागर द्वारा बनाए जाने वाले इस भव्य स्मारक मेंं यथासंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। उल्लेखनीय है कि बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह को 1857 के संग्राम के बाद 9 जनवरी 1958 को दिल्ली के टाउन हॉल चौक पर सरेआम फांसी दे दी गई थी लेकिन अभी तक इस ऐतिहासिक नगरी में राजा नाहर सिंह की कोई प्रतिमान नहीं है। यही कारण है कि आज उनके बलिदान दिवस पर आयोजित समारोह में सत्यवीर डागर ने प्रस्ताव रखा कि सरकार इस अमर शहीद प्रतिमा के लिए उनको स्थान उपलब्ध कराएं क्योंकि उन्होंने महाराजा नाहर सिंह की 26 फीट ऊंची प्रतिमा बनवा नी शुरू कर दी है। वरिष्ठ किसान नेता सत्यवीर डागर द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव का बलिदान दिवस समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने एकमत में स्वागत किया और इस मौके पर उपस्थित हरियाणा के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा से समारोह के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग रखी, जिस पर पंडित मूलचंद शर्मा ने कहा कि सत्यवीर डागर द्वारा प्रस्तावित इस समारोह के लिए वह यथासंभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इस मौके पर गुरुकुल इंद्रप्रस्थ के संचालक आचार्य ऋषिपाल ने प्रस्ताव रखा कि क्योंकि राजा नाहर सिंह का इस देश के स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान रहा है इस कारण सरकार को चाहिए की फरीद के नाम पर रखे गए इस जिले का नाम भी फरीदाबाद के स्थान पर स्वतंत्रता सेनानी राजा नाहर सिंह के नाम पर राजा नाहर सिंह रखा जाना चाहिए। बलिदान दिवस पर आयोजित समारोह में आयोजक सत्यवीर डागर ने कहा कि वह ने तो राजा नाहर सिंह के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं और ना ही उनके नाम पर राजनीति करने वालों से उनको गुरेज है लेकिन इतना जरूर चाहते हैं कि इस क्षेत्र के लोग यह याद रखें कि उनके पूर्वजों ने उन को आजादी दिलाने के लिए जो बलिदान दिए थे वह किसी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि जब वह हर साल 9 जनवरी को राजा नाहर सिंह को श्रद्धांजलि देते हैं तो कहीं ना कहीं उनको यह बात बहुत परेशान करती है कि जिस उनके राजा ने अंग्रेजों को चुनौती देते हुए खुद के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चुन लिया हो उस राजा की नगरी में हम लगभग 170 साल बीत जाने के बाद भी उनकी एक प्रतिमा तक नहीं लगा पाए उन्होंने कहा की यही कारण है कि उन्होंने सभी समाजों के लोगों से राय मशविरा कर यह फैसला लिया है कि अब बल्लभगढ़ में बल्लभगढ़ के राजा की प्रतिमा भी लगाई जाएगी। इस अवसर पर मास्टर मोहन तंवर, नरबीर तेवतिया, रिछपाल लाम्बा, सुभाष प्रधान, अवतार सारंग, आनंदपाल राठी, रामरतन, देवराज आर्य, सुखबीर सरपंच, प्रदीप डागर, बाबू बौहरे जी, ओमी यादव, सुषमा यादव, प्रेम खट्टर, धर्मपाल चहल, आजाद छिकारा, राहुल देव खुटैला, संदीप, किशनपाल आजाद सहित अनेकों गणमान्य लोग मौजूद थे।