Faridabad NCR
गीता जयंती महोत्सव में संस्कृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत संगम: मेयर प्रवीण जोशी
Faridabad Hindustanabtak.com/Dinesh Bhardwaj : 30 नवंबर। नगर निगम मेयर प्रवीण जोशी ने कहा कि जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव में दर्शकों को संस्कृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गीता जयंती महोत्सव युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए गौरवशाली ज्ञान परंपरा से परिचित करा रहा है। नगर निगम मेयर प्रवीण जोशी ने रविवार को सेक्टर-12 कन्वेंशन सेंटर में आयोजित जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
मुख्य अतिथि ने सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा लगाई गई श्रीमद्भगवद गीता पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें गीता के अठारह अध्यायों का सार, महाभारत के प्रमुख प्रसंग, भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, तथा आधुनिक जीवन में गीता के संदेश की प्रासंगिकता को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों तथा सामाजिक/धार्मिक संस्थाओं द्वारा लगाए गए जनकल्याणकारी स्टॉलों का भी निरीक्षण किया गया।
मेयर प्रवीण जोशी ने कहा कि हमारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल देने का अधिकार परमात्मा का है और वह भी हमारे कर्मों पर आधारित होता है। आज के प्रतिस्पर्धी वातावरण में अक्सर यह संदेश दिया जाता है कि “अपना सर्वश्रेष्ठ दो”, और जब व्यक्ति पूरे समर्पण के साथ प्रयत्न करता है तो संपूर्ण ब्रह्मांड उसकी सहायता में खड़ा हो जाता है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा किया, जिसमें केरल में आयोजित ऑल इंडिया मेयर काउंसिल की बैठक में एक विदेशी प्रतिनिधि से हुई बातचीत का उल्लेख किया। श्रीलंका से आई एक मेयर द्वारा कृष्ण-भक्ति के प्रति विशेष लगाव प्रकट करने पर उन्होंने उससे पूछा कि वह कृष्ण के जन्मस्थान के बारे में क्या जानती हैं। उत्तर में उसे कुरुक्षेत्र का स्थान तक ज्ञात नहीं था। इस अवसर पर उन्होंने हरियाणा और कुरुक्षेत्र की पावन भूमि का परिचय देकर उसे भारत आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि अनेक सत्यों को हम पारस्परिक संवाद के माध्यम से ही बेहतर समझ पाते हैं, जो पुस्तकों में सदैव नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता यह है कि हम अपने बच्चों को गीता, रामायण और भारतीय दर्शन के मूल्यों से परिचित कराएं। तकनीक के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चे कहीं न कहीं अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रधर्म की महत्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है। उनका मानना था कि चाहे घर में बैठकर ही क्यों न हो, व्यक्ति अपने धर्मग्रंथों का अध्ययन और ईश्वर का स्मरण कर सकता है, परंतु राष्ट्र की सेवा सर्वोच्च स्थान रखती है। उन्होंने गीता के एक और प्रमुख सिद्धांत “अहम् ब्रह्मास्मि” तथा “तत्त्वमसि” का संदर्भ दिया और कहा कि जब हम सभी में ईश्वर का अंश देखते हैं, तो जीवन में द्वेष, क्रोध और अहंकार की गुंजाइश ही नहीं रहती। उन्होंने कहा कि यह किसी प्रकार का उपदेश नहीं, बल्कि उनके जीवन का अनुभव है कि कर्मनिष्ठ भाव से कार्य करने पर फल स्वयं अनुकूल होता जाता है।
बड़खल एसडीएम त्रिलोक चंद ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी ज्ञान परंपरा को स्वीकारने से पहले उसका सम्यक् अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि बिना समझे किसी भी सत्य को मानना कठिन होता है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र का महत्व इसलिए अद्वितीय है कि यह वही पुण्यभूमि है जहां ऋषि-मुनियों ने युगों तक तप कर ज्ञान का संचय किया और जहां श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश हुआ।
गीता के प्रथम श्लोक ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’ का उल्लेख करते हुए एसडीएम ने कहा कि यह शब्द स्वयं इस भूमि के तप, त्याग और धर्म-रक्षा के इतिहास का प्रमाण हैं। उन्होंने कुरु वंश द्वारा धर्म की रक्षा हेतु किए गए बलिदानों का भी उल्लेख किया, जिनके कारण यह क्षेत्र ‘धर्मक्षेत्र’ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश केवल एक योद्धा का मार्गदर्शन नहीं, बल्कि मानव जीवन के सार्वभौमिक सिद्धांतों का प्रकाश है। गीता सत्व, रज और तम—इन तीन गुणों के संतुलन की व्याख्या करती है और मानव जीवन में कर्मप्रधानता को सर्वोपरि बताती है।
इस अवसर पर मनोनीत पार्षद जसवंत पवार, नगर निगम सचिव डॉक्टर विजय पाल यादव, जिला शिक्षा अधिकारी अंशुल सिंगला, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, समाजसेवी, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
