महात्मा गाँधी के जीवन के प्रेरक प्रसंगो ने दिया छात्रों को पर्यावरण संरक्षण का सन्देश ”पृथ्वी दिवस” पर प्रश्न्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 22 अप्रैल को ”Earth Day – पृथ्वी दिवस” के अवसर पर राष्ट्रीय गाँधी संग्रहालय एवं पुस्तकालय और एन बी सी एफ डी सी नई दिल्ली के सहयोग से डी ए वी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद में ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पर्यावरण सुरक्षा की इस वैश्विक मुहीम को देश के युवा वर्ग में जागृत करने और उसमें योगदान करने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से “पृथ्वी -दिवस” के उपलक्ष्य में डी.ए.वी शताब्दी कॉलेज के छात्रों के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित कराई गई। कॉलेज की कार्यकारी प्राचार्य डॉ सविता भगत के दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन द्वारा इस प्रतियोगिता का मंचन गूगल मीट प्लेटफॉर्म पर किया गया। राष्ट्रीय गाँधी संग्रहालय के प्रतिनिधि सुश्री दीपाली ने “वैष्ण्व जन” भजन के साथ कार्यक्रम का मंच संचालन प्रारम्भ किया। डी ए वी शताब्दी कॉलेज के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रोफेसर डॉ नीरज सिंह ने महात्मा गाँधी को न केवल महान विचारक, दार्शनिक अपितु एक पर्यावरणविद भी मानते हुए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्य को वर्तमान पर्यावरण-संरक्षण के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सार्थक बताया। गाँधी जी का एक वक्तवय “earth has enough for everyone’s need but not enough for everyones greed” “पृथ्वी दिवस” मनाने के उद्देश्य को सार्थक करता है। गाँधी जी का लक्ष्य “सादा जीवन उच्च विचार “वर्तमान “उपभोक्ता संस्कृति” पर कटाक्ष करते हुए माटी से जुड़े रहने का संदेश देता है। डॉ नीरज सिंह ने गाँधी जी के द्वारा आजीवन पालन किये गए 11 व्रतों – सत्य, अहिंसा, असत्य, ब्रम्हचर्य, असंग्रहण, शारीरिक श्रम, अस्वदन, भयवर्जन, सर्वधर्म समभाव, स्वदेशी और अस्पृश्यता के विषय में बताते हुए न केवल भौतिक बल्कि मानवीय पर्यावरण को भी समस्त कुरीतियों से संरक्षित करने का आग्रह किया। राष्ट्रिय गाँधी संग्रहालय के निदेशक श्री ए अन्नामलाई जी ने डी ए वी संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा की यह संस्थान निरंतर देश की युवा पीढ़ी में संस्कारों और मूल्यों को ग्रहण करने और उनका संरक्षण करने उन्हें निजी जीवन में आत्मसात करने की सीख देता चला आ रहा है। उन्होंने महात्मा गाँधी जी के आर्य समाज से उनकी वैचारिक नजदीकी का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम की नींव रखने वाले एन .बी. सी .एफ. डी. सी. के एम. डी रहे श्री के नारायण जी ने कहा की राष्ट्रीय गाँधी संग्रहालय पिछले दो वर्षो से महात्मा गाँधी की विचार धारा और संदेशों को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शनी, वृतचित्र, प्रश्नोत्तरी इत्यादि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों तक प्रेषित करने का प्रयास करता आ रहा है परंतु कोविड की इस वैश्विक महामारी के बीच आज कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों को ईश्वर के प्रति आस्था रखने का संदेश देते हुए उन्हें एक नई सोच शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया। गांधी जी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने छात्रों को हर चुनौती से बाहर निकलने के लिए और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने को कहा। राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की तरफ से सुश्री दीपाली ने गांधी जी की कथा सुनाते हुए बच्चों को यह सीख दी कि किसी भी जन के द्वारा भेंट किए गए उपकार को अमूल्य समझ कर उसका प्रयोग करना चाहिए और उसका संरक्षण करना चाहिए। गांधी जी की कथा ने छात्रों को पर्यावरण एवं प्रकृति- प्रदत संसाधनों को अनमोल समझकर उन्हें उचित रूप से उपयोग करने और आगामी भविष्य हेतु सहेज कर रखने की सीख प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की वर्चुअल सैर कराई गई जिसमें चित्र प्रदर्शनी और स्लाइड शो के माध्यम से महात्मा गांधी जी के जीवन से सभी छात्रों को अवगत कराया गया इसके बाद प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें कुल 5 टीमों ने तथा 10 छात्रों ने भाग लिया। 5 चरणों में संपन्न हुई इस प्रतियोगिता में टीम सर्वोदय से महिमा और नव्या ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया, सत्य टीम के नवनीत और श्वेता ने द्वितीय पुरस्कार जीता। प्रश्नोत्तरी के दौरान दर्शक दीर्घा में उपस्थित छात्रों और शिक्षकों में भी काफी उत्साह एवं जिज्ञासा दिखाई दी। क्विज प्रतियोगिता के सफल संचालन में राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के प्रतिनिधि श्री अंसार अली और सुश्री दीपाली की अहम भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में नेशनल गांधी म्यूजियम की प्रतिनिधि मोक्षदा शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में डीएवी शताब्दी कॉलेज के कई प्राध्यापकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रो. रचना कसाना, प्रो. श्वेता वर्मा, प्रो. सुजाता लखोटिया, प्रो. बिंदु रॉय  तथा कई अन्य प्राध्यापकों ने कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया। 2021 पृथ्वी दिवस के इस कोविड आपदा के बीच भी छात्रों के बीच कार्यक्रम को लेकर अत्यंत आशा एवं उल्लास का वातावरण दिखाई दिया निश्चित रूप से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।