सूचना प्रौद्योगिकी युग में शोध कार्यों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की उपयोगिता बढ़ी : कुलपति प्रो. दिनेश कुमार

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 22 मार्च। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के पंडित दयाल उपाध्याय सेंट्रल लाइब्रेरी द्वारा ‘अनुसंधान सहयोग सेवाओं में नया आयामः समकालीन पुस्तकालय परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित एक सप्ताह का आनलाइन शार्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स (एसटीटीपी) संपन्न हो गया। एआईसीटीई द्वारा प्रायोजित इस कोर्स में 15 से अधिक राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
समापन सत्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के कला निधि प्रभाग के प्रमुख डॉ. आर.सी. गौड़ मुख्य अतिथि रहे। डॉ. गौर ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विश्वविद्यालय को बधाई दी और विश्वविद्यालय में अनुसंधान सहयोग सेवाओं के महत्व पर बल दिया। उन्होंने एसटीटीपी के आयोजन के लिए लाइब्रेरियन डॉ पी.एन. बाजपेयी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रीति सेठी तथा पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. आशुतोष दीक्षित ने की और विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को विभिन्न शोध सहयोगी सेवाएँ प्रदान करने के लिए पुस्तकालय प्रयासों की प्रशंसा की।
यूनिवर्सिटी सेंट्रल लाइब्रेरी की पहल की सराहनीय बताते हुए कुलपति प्रो दिनेश कुमार ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में डिजिटल लाइब्रेरी जैसी अनुसंधान सहयोगी सेवाएं शैक्षिक और अनुसंधान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को सामान्य सूचना संसाधनों को साझा करने और विभिन्न श्रेणी की पाठ्य सामग्रियों का लाभ उठाने में मदद देती है। उन्होंने विभिन्न प्रतिभागी पुस्तकालयाध्यक्षों से अनुसंधान सहयोगी सेवाओं की जानकारी तथा प्रसार में सहयोग देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. पी.एन. बाजपेयी ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा बताया कि इस ट्रेनिंग कोर्स में उत्तराखंड, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित देशभर के विभिन्न राज्यों से 88 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कोर्स के दौरान एनआईटी और आईआईटी के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा 19 सत्र आयोजित किए गए। अंत में कार्यक्रम की सह-समन्वयक डॉ. प्रीति सेठी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।