अनुसंधान सहयोगी सेवाओं पर एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 17 मार्च। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के पंडित दयाल उपाध्याय सेंट्रल लाइब्रेरी द्वारा ‘अनुसंधान सहयोग सेवाओं में नया आयामः समकालीन पुस्तकालय परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर एक सप्ताह का आनलाइन शार्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। एआईसीटीई द्वारा प्रायोजित इस कोर्स में 15 से अधिक राज्यों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे है। कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज (सीएसआईआर-एनआईएएसएडीएस) की निदेशक प्रो रंजना अग्रवाल ने किया और सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो दिनेश कुमार ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत लाइब्रेरी के चेयरमैन प्रो. आशुतोष दीक्षित द्वारा स्वागतीय संबोधन से हुई। इसके उपरांत प्रो. रंजना अग्रवाल ने अतिथ्यि संबोधन प्रस्तुत किया। सत्र का समन्वय डाॅ. पीएन बाजपेयी तथा डॉ. प्रीति सेठी द्वारा किया गया।
सत्र को संबोधित करते हुए प्रो। रंजना ने कहा कि सूचना परिदृश्य में बदलाव के कारण शैक्षणिक पुस्तकालयों ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सहयोग सेवाओं पर ध्यान केन्द्रित किया है तथा अपनी सेवाओं में बड़े पैमाने में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों द्वारा अनुसंधान केन्द्रित बदलाव समय की मांग है ताकि शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को शोध-संबंधित जानकारी उपलब्ध हो सके।
प्रो. दिनेश कुमार ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए केंद्रीय पुस्तकालय की पहल की सराहना की तथा विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा शिक्षकों के लिए इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डॉ. पी.एन. बाजपेयी ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को उनकी अनुसंधान क्षमताओं में सुधार लाने और बेहतर अनुसंधान सहयोग सेवाएं प्रदान करने में मदद करना है। सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम को शोध सहायक सेवाओं के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले लाइब्रेरियन तथा शिक्षाविद् संबोधित करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और ई-संसाधनों के बारे में भी बताया।