डी.ए.वी शताब्दी महाविद्यालय में सात दिवसीय फैकल्टी रेजुवेनशन प्रोगाम का सफलतापूर्वक आयोजन

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : नए सत्र 2021-2022 के शुरुआत में शिक्षक-शिक्षिकाओं को कोविड-19 की इस वैश्विक महामारी के बीच शिक्षण कार्य प्रारम्भ करने हेतु सचेत एवं सजग करने के लिए फैकल्टी रेजुवेनशन प्रोगाम का आयोजन किया गया। इस सात दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ 6 अप्रैल को किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों को साॅफट स्किल्स, पाॅवर आफ मांइड, फोकस एंड मैमोरी, दार्शनिक चिन्तन, संस्कृत के विविध आयाम जैसे विषयों पर विशिष्ट व्याख्यानों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम दिन डी.ए.वी शताब्दी कालेज से अंग्रेजी विभाग से सेवानिवृत प्रो. अरुण भगत जी ने शिक्षकों को ‘‘साॅफट स्किल्स’’ के आयामों से परिचित कराया। उन्होंने शिक्षकों को वर्तमान जटिल परिस्थितियों में शिक्षण कार्य करते समय धैर्य, प्रेम, विश्वास, लोचशीलता, सजगता, सहानुभूति, अच्छी संप्रेषण शैली, नेतृत्व शैली, सामाजिक कौशल और संवेदनशीलता जैसे विभिन्न गुणों को अपने अन्दर आत्मसात करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रो. अरुण भगत जी ने दूसरे दिन शिक्षकों के साथ परस्पर संवादात्मक शैली में व्याख्यान देते हुए उन्हें अंग्रेजी के अनेक शब्दों से परिचय कराते हुए उनकी शब्दावली कोष में वृद्वि करने का अत्यन्त सफल प्रयास किया जिसे शिक्षकों के द्वारा बहुत अधिक सराहा गया।

एस.डी काॅलेज पलवल से अंग्रेजी विभाग के एसोसिएट प्रो. डाॅ. मंजुला बत्रा जी ने ‘‘पाॅवर आॅफ मांइड: मंाइड आॅवर मैटर’’ विषय पर चर्चा करते हुए शिक्षकों को इस सृष्टि में अपने योगदान करने के बारे में चिन्तन प्रारम्भ करने पर जोर देने को कहा। उन्होंने कहा कि जीवन में सकरात्मक पहलुओं की ओर दृष्टि रखने से ही हम स्वयं को मानसिक रुप से सशक्त कर सकते है और जैसी दृष्टि रखेंगे वैसी ही सृष्टि का निर्माण करेंगे।

आजकल बहुमुखी आयामों में जकड़ी हमारी शिक्षा एवं शिक्षण प्रणाली शिक्षकों को एकाग्रता के गुण स्वयं में विकसित करने के लिए कहती है। इसी विषय पर अन्र्तराष्टीय वक्ता, प्रशिक्षक, लेखक, लिम्का रिकार्ड होल्डर श्री अनन्त कासीभाटला जी ने शिक्षकों को एकाग्रता एवं स्मृति कौशल विकसित करने की रणनीतियों से अभिज्ञ कराया। उन्होंने शिक्षकों को अपने दृष्टिकोण को स्थिर रखते हुए निरन्तर लक्ष्य का अनुसरण करने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ध्यान में बाधा डालने वाले तत्वों पर चर्चा करते हुए शिक्षकों को अपनी इच्छा शक्ति को पूरी तन्मयता और लगनशीलता से मजबूत रखने को कहा।

कार्यक्रम के पाॅचवें दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रो. राजेश्वर प्रसाद मिश्र सेवानिवृत जी ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के दार्शनिक चिन्तन पर प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यन्त विस्तारपूर्वक दयानन्द जी के द्वारा स्थापित त्रैतवाद के सिद्वान्तों से शिक्षकों का ज्ञानवर्धन किया। उन्होेंने यथार्थवादी दार्शनिक चिन्तन के स्वामी दयानन्द जी के द्वारा बताए गए ईश्वर, जीव व जगत इन तीन तत्वों के अनादि और अनन्त होने के विभिन्न उदाहरणों पर चर्चा करते हुए एकेश्वरवाद की बात कही। इस विशिष्ट व्याख्यान का अध्यक्षता डी.ए.वी. शताब्दी महाविद्यालय की भूतपूर्व संस्कृत विभागाध्यक्षा डाॅ. दिव्या त्रिपाठी ने की। उन्होंने अत्यन्त सरल शब्दों में स्वामी दयानन्द के दार्शनिक चिन्तन का वर्णन किया और इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए प्राचार्या महोदया को हार्दिक धन्यवाद दिया।

फैकल्टी रेजुवेनशन कार्यक्रम के अन्तिम दिन सनातन धर्म कालेज, लाहौर, अम्बाला छावनी के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. आशुतोष अंगिरस ने संस्कृत के विविध आयामों पर जानकारी दी। डाॅ. आशुतोष अंगिरस ने संस्कृत भाषा, भाव, विचार एवं व्यवहार के विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की। इस कार्यक्रम से निश्चित रुप से सभी शिक्षकों ने ज्ञान लाभ अर्जित किया। डी.ए.वी. कालेज के कार्यवाहक प्राचार्या डाॅ.सविता भगत के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में इस कार्यक्रम का आॅनलाइन और आॅफ लाइन दोनों माध्यमों से आयोजन कराया गया। कालेज के सभी विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया और एक नए दृष्टिकोण एवं लक्ष्य के साथ नए सत्र का प्रारम्भ करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम के माध्यम से काॅलेज प्राचार्या डाॅ. सविता भगत ने सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण प्राप्त कर एक नई उर्जा और सकरात्मक विचारों के साथ छात्र एवं संस्था के हित में शिक्षण कार्य करने की अभिप्रेरणा दी।

इस कार्यक्रम में डाॅ. अर्चना भाटिया, डाॅ. विजयवन्ती, डा. अंजू गुप्ता, डाॅ. शिवानी, डाॅ. नीरज, मिस सुनीता डुडेजा, डा. अुकर, श्री दिनेश कुमार, डाॅ. अमित, मिस बिन्दु राय की विशेष भागीदारी रही।