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श्रीमद्भगवद गीता विश्व का शाश्वत और सार्वकालिक ज्ञान का भंडार है: पंडित मूलचंद शर्मा

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Faridabad Hindustanabtak.com/Dinesh Bhardwaj : 29 नवंबर। जिला फरीदाबाद के सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी कन्वेंशन सेंटर में तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव–2025 का भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं हरियाणा सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में यज्ञ में आहुति डालकर और दीप प्रज्वलित कर किया।

मुख्य अतिथि ने सर्वप्रथम सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा लगाई गई श्रीमद्भगवद गीता पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें गीता के अठारह अध्यायों का सार, महाभारत के प्रमुख प्रसंग, भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, तथा आधुनिक जीवन में गीता के संदेश की प्रासंगिकता को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों तथा सामाजिक/धार्मिक संस्थाओं द्वारा लगाए गए जनकल्याणकारी स्टॉलों का भी निरीक्षण किया गया।

अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि गीता जयंती महोत्सव हमारे समाज को संस्कृति, अनुशासन और नैतिकता की दिशा में प्रेरित करने वाला उत्कृष्ट मंच है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि पंडित मूलचंद शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता विश्व का शाश्वत और सार्वकालिक ज्ञान का भंडार है, जिसके उपदेश न केवल भारत बल्कि विश्व के अनेक देशों में जीवन प्रबंधन, नेतृत्व, कर्तव्यपरायणता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अपनाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता मनुष्य को कर्मयोग का उपदेश देती है, जिसका अर्थ है परिणाम की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करना। यह ग्रंथ हमें स्थितप्रज्ञ बनने की प्रेरणा भी देता है, जिससे व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मन को स्थिर, शांत और संतुलित रख पाता है।

उन्होंने कहा कि गीता जी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलन, संयम और धैर्य को अपनाने की सीख देती है, जो मनुष्य को सही निर्णय लेने और जीवन की राह में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करती है। आधुनिक समय में जब तनाव, भ्रम, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, ऐसे में गीता का ‘निष्काम कर्म’ और ‘अध्यात्म आधारित जीवन’ अत्यंत आवश्यक सिद्ध होता है। यह हमें न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन को सकारात्मकता, स्पष्टता और आत्मबल के साथ जीने की दिशा भी दिखाता है।

मुख्य अतिथि श्री शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता वास्तव में आधुनिक मनुष्य के लिए जीवन प्रबंधन का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है, जिसमें मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता, नेतृत्व कला और आत्मबोध जैसे विषयों का अद्वितीय समाधान मिलता है।

उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में गीता जयंती महोत्सव को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। उनके प्रयासों से गीता जयंती केवल धार्मिक अनुष्ठान न रहकर एक सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक अभियान बन चुकी है, जिसे विश्व के अनेक देश अत्यंत आदर के साथ देखते हैं।

मुख्यातिथि ने जिला प्रशासन को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं, युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं और समाज को एकता व सद्भाव के संदेश से ओतप्रोत करते हैं।

जिला प्रशासन ने मुख्य अतिथि पंडित मूलचंद शर्मा को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विभिन्न कलाकारों ने श्रीमद्भगवद गीता के उपदेशों पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य, नाटक, भजन, कृष्ण लीला और योगाभ्यास की प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों को भक्ति, ज्ञान और संस्कृति से परिपूर्ण कर दिया।

कार्यक्रम में महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया, जिला अध्यक्ष सोहनपाल छोकर, एसडीएम बड़खल त्रिलोक चंद, एसडीएम बल्लभगढ़ मयंक भारद्वाज, नगराधीश अंकित कुमार, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी मूर्ति दलाल, विभिन्न विभागों के अधिकारी, समाजसेवी, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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