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Faridabad Hindustanabtak.com/Dinesh Bhardwaj : 17 जनवरी। भारत ऐतिहासिक जनसांख्यिकीय संक्रमण से गुजर रहा है, जिसमें 2036 तक वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 230 मिलियन और 2050 तक 320 मिलियन पार करने का अनुमान है। वृद्धावस्था के लिए व्यापक, अधिकार-आधारित और शासन-केंद्रित रणनीतियों की आवश्यकता अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है। इसे ध्यान में रखते हुए, मानव रचना विश्वविद्यालय ने दक्ष फाउंडेशन के सहयोग से “एजिंग इंडिया: उभरती चुनौतियाँ और समावेशी समाधान” विषय पर सीनियर सिटीजन वेलफेयर 2026 सम्मेलन आयोजित किया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण को अच्छे शासन, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का केंद्रीय स्तंभ मानते हुए उनके अधिकारों, गरिमा और समाज में सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि हरियाणा सरकार के राज्य मंत्री (भोजन, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले) श्री राजेश नागर थे। उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री हनीफ कुरैशी, आईपीएस भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक ज्ञान और मूल्यों का महत्वपूर्ण भंडार हैं, और भारत की युवा पीढ़ियों को उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जितना बुज़ुर्गों को सुरक्षा की। उन्होंने नीति-संचालित, समावेशी शासन ढाँचों की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और अंतरपीढ़ी जिम्मेदारी सुनिश्चित करें।
श्री राजेश नागर ने कहा, “वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज का अहम हिस्सा हैं, जो अपने अनुभव, ज्ञान और मूल्यों के साथ समाज को दिशा देते हैं। उनके कल्याण, सम्मान और समाज में सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझना और उनके कल्याण के लिए नीतियों तथा समर्थन प्रणालियों को मजबूत करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।“
डॉ. आशा वर्मा, डीन, स्कूल ऑफ लॉ, मानव रचना विश्वविद्यालय ने कहा, “वरिष्ठ नागरिकों को समाज अक्सर नजरअंदाज करता है। ये चुनौतियाँ वित्तीय असुरक्षा, अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य, साइबर धोखाधड़ी, संपत्ति विवाद और कानूनी सुरक्षा की कमी जैसी हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य इन वास्तविकताओं को नीति और शासन चर्चा में लाना है। हमारा लक्ष्य परोपकारी समाधानों से आगे बढ़कर अधिकार-आधारित, सम्मानजनक और जवाबदेह ढांचे तैयार करना है, जो बुज़ुर्गों को समाज का अभिन्न हिस्सा मानें। इन विचार-विमर्श का परिणाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण को मजबूत करने वाली ठोस नीतिगत सिफारिशों के रूप में सामने आएगा।”
ब्रिगेडियर एन एन माथुर, मुख्य सलाहकार (एल्डर केयर एवं वेलफेयर), दक्ष फाउंडेशन ने कहा, “हमारी पहल ‘ख़याल अपने बुज़ुर्गों का’ वरिष्ठ नागरिकों के लिए जागरूकता को कार्रवाई में बदलने का प्रयास है। नीति निर्माता, विशेषज्ञ और युवाओं को एक मंच पर लाकर यह सम्मेलन बुज़ुर्गों की गरिमा, शासन और अंतरपीढ़ी संवाद को मजबूत करता है, जिससे वरिष्ठ कल्याण भारत की सामाजिक और नीति प्राथमिकताओं के केंद्र में रहे।”
इस अवसर पर दक्ष फाउंडेशन के, एवीएम एल एन शर्मा, मुख्य सलाहकार (शिक्षा, नैतिकता और मूल्य) भी उपस्थित थे, जिन्होंने बच्चों को बुज़ुर्गों के सम्मान के महत्व को सिखाने और अनुशासन को आत्मसात करने पर जोर दिया। इसके साथ ही श्री संजय कुंदू, आईपीएस, मुख्य सलाहकार (शासन और सार्वजनिक सुरक्षा) भी दक्ष फाउंडेशन से उपस्थित थे, जिन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल पर केंद्रीय सरकार की नीतियों के पालन और कार्यान्वयन पर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन की चर्चाएँ चार आपस में जुड़े विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रित थीं, जो भारत में वरिष्ठ नागरिक कल्याण के मुख्य आयाम हैं। चर्चाओं में सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन, कानूनी सुरक्षा, सुरक्षा और न्याय तक पहुंच, वृद्धावस्था स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, पारिवारिक समर्थन और सामाजिक गरिमा जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिक-अनुकूल बुनियादी ढांचा, नीति नवाचार और आयु-मैत्रीपूर्ण शासन ढांचे की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।
सम्मेलन की एक विशेषता अंतरपीढ़ी संवाद पर जोर था, यह मानते हुए कि भारत के युवाओं को मूल्य-आधारित मार्गदर्शन, नागरिक शिक्षा और राष्ट्रीय प्रेरणा की आवश्यकता है—ऐसे क्षेत्र जहां वरिष्ठ नागरिक और पूर्वसैनिक मार्गदर्शक और परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं। बुज़ुर्गों को मार्गदर्शक, अनुभव के संरक्षक और सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में प्रस्तुत कर, सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना अच्छे शासन, जवाबदेही और समावेशी राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य है।
इस राष्ट्रीय बहु-हितधारक मंच के माध्यम से, दक्ष फाउंडेशन की प्रमुख पहल ‘ख़याल अपने बुज़ुर्गों का’, मानव रचना विश्वविद्यालय, वेटरन इंडिया फाउंडेशन और ऑल इंडिया लॉयर्स फोरम के सहयोग से, वृद्धावस्था पर चर्चा को नीति-उन्मुख, शैक्षणिक रूप से कठोर और राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाने का प्रयास करती है। यह सम्मेलन शासन सुधार, संस्थागत सहयोग और सामाजिक बदलाव के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करने का लक्ष्य रखता है और भारत की वरिष्ठ नागरिकों के प्रति गरिमा, समावेशन और न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।