जे सी बोस के छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर ऑनलाइन पेटिशन चलाया, UGC में भी की शिकायत

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 20 मई। जे सी बोस ymca के छात्रों ने पिछले कई दिनों से विश्वविद्यालय प्रशासन के कई अव्यवहारिक आदेशों के कारण होने वाली समस्याओं को लेकर कई ऑनलाइन पेटिशन और सोशल मीडिया पर कई तरह के कैंपेन चलाया हुआ है, छात्रों का कहना है कि प्रशासन केवल यूजीसी के नियम-निर्देशों को मानाने का दिखावा करती है पर असलियत में वह सभी कार्यों में अपनी मनमानी करती आई है। इस आपदा की स्थिति में यूजीसी के निर्देश के अनुसार हर विश्वविद्यालय को एक covid-19 सेल बनाना था जो कि छात्रों की सभी समस्या और सुझाव को सुने और उनकी उचित मदद करे, मगर विश्वविद्यालय ने 10 सदस्यों का एक कमिटी पैनल बनाया था जो आने वाली परीक्षा को लेकर नए नियम और बदलाव के काम करने के लिए थी, और इसे ही covid-19 सेल बताकर औपचारिकता पूरी कर दी। अभी तक यह बिलकुल स्पष्ट नही किया गया है कि इस covid-19 सेल में कैसे,कहाँ और किसके पास संपर्क करना है। जब विद्यार्थी सम्बंधित विभाग के प्राचार्यो एवं शिक्षकों के पास अपनी बातें रखते है तो वह हर बात का यही जवाब देते हैं कि ‘ऊपर से आदेश आया है,हम सबको मानना होगा’। यूजीसी ने छात्रों से विचार विमर्श और सहयोग करने का निर्देश दिया था, पर यहाँ ऐसा कुछ नही हुआ, सर्वे के नाम पर एक ऑनलाइन गूगल फॉर्म भरने को भेजा गया था, मगर वो हैंग हो रहा था, और तकनिकी खामियों के कारण काफी कम लोग इसे भर पाये, इसको लेकर भी शिकायत की गई पर कोई जवाब नही आया।
अन्य सभी मुद्दों पर भी कोई सुनवाई नही हुई जैसे- प्रैक्टिकल फाइल बनाने को अनिवार्य करना, सबको ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए बाध्य करना, जरूरत से ज्यादा असाइंगमेन्ट लगातार बनवाना, बड़े प्रोजेक्ट एवं रिपोर्ट को इस लॉकडाउन के कठिन समय में भी पूरा करने को बाध्य करना। इन सभी प्रक्रियाओं में इंटरनेट का होना भी एक प्रमुख समस्या है, कई छात्रों के पास मजूबत इंटरनेट सुविधा नही है, ज्यादातर के पास इंटेरनेट है भी तो कंप्यूटर या लैपटॉप नही है, और मोबाइल फ़ोन से सारे काम करने में सुविधा नही हो पाती। इन्ही सभी बातों को लेकर छात्रों ने प्रशासन और कुलपति सहित कई उच्च अधिकारियों को ईमेल भी किया है, सोशल मीडिया पर अपनी बात भी लिखी है, यूजीसी के ऑनलाइन ग्रीवेंस पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत भी दर्ज करवाई है उसका स्क्रीनशॉट विश्वविद्यालय को भी ईमेल किया, इतने प्रयासों के बाद भी अभी तक छात्रों के हक़ में निर्णय नही लिया गया है।
इसके इत्र विद्यार्थियों की सबसे प्रमुख मांग यही रही है कि ऑनलाइन माध्यम से पढाई उतना कारगर नही है जिससे कि आने वाली बड़ी परीक्षाओं की पूरी तैयारी हो पाये, खासकर इंजीनियरिंग कोर्स के लिए यह समय काफी कठिन है क्योंकि यूजीसी के नियम अनुसार इंजीनियरिंग/मेडिकल जैसे कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन/ओपन/दूरस्त माध्यम से करना अव्यवहारिक ही नही बल्कि गैर कानूनी भी है, अगर इस आपदा की स्थिति में ऐसा किसी मज़बूरी में करना पड़ भी रहा हो तो परीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी बदलकर आसान किया जाये, आईआईटी बॉम्बे और एनआईंटी कुरुक्षेत्र सहित कई बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों ने मुख्य परीक्षा को रद्द करके विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन और पिछले सेमेस्टर के आधार पर उत्तीर्ण कर दिया है। अंतिम वर्ष के छात्रों को सबसे पहले बिना समय व्यर्थ किये उत्तीर्ण कर डिग्री दी जाये। डीटीयू, मुंबई युनिवेर्सिटी समेत देश के बड़े बड़े शिक्षण संस्थानों में भी इसी तरह की मांग की जा रही है, और हमारे विश्वविद्यालय के छात्रों की भी यही मांग हैं कि मुख्य सेमेस्टर परीक्षा को रद्द किया जाये और अभी तक हुए आतंरिक मूल्यांकन के आधार पर सब को उत्तीर्ण किया जाये।