ट्राइब्स इंडिया के बोर्ड देखकर जनजातीय कृषकों, बुनकरों और कारीगरों की मेहनत परिलक्षित हो रही

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 6 फरवरी। हमारे देश के वनों में रहने वाले लोग भी कितने प्रतिभावान हैं, इसका अनुमान ट्राइब्स इंडिया की ओर से 34वें सूरजकुंड मेले में लगाई गई स्टालें देख कर सहज लगाया जा सकता है।
34वें सूरजकुंड मेले में 280 से 289 नंबर की स्टालों पर ट्राइब्स इंडिया के बोर्ड देखकर जनजातीय कृषकों, बुनकरों और कारीगरों की मेहनत परिलक्षित हो रही है। यहां फलों के रस को शहद में मिलाकर अलग-अलग फ्लेवर के बेवरेज बेचे जा रहे हैं। जो कि आपके पेट, लीवर और गुर्दों के लिए काफी  फायदेमंद हैं। मणिपुर से आए पैमथिंग व ट्राइब्स इंडिया के सीबी सिंह ने बताया कि उनके मंत्रालय का वित्तीय निगम भी बना हुआ है। जो कि जनजातीय वर्ग के कारीगरों और बुनकरों को बैंकों से लोन दिलवाने में मदद करता है। टाइब्स इंडिया का प्रमुख उद्देश्य है बिचौलियों के चंगुल से वन क्षेत्र में रहने वाले हस्तकरघा कारीगरों या कृषकों को बाहर निकालना। इससे उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
सीबी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय कुटीर उद्योगों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री वन धन योजना का शुभारंभ करवाया है। इस योजना के अंतर्गत हजारों निर्धन कारीगरों को लोन और उनके उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध करवाया गया है। पैमथिंग ने बताया कि उनके पास दुनिया की सबसे तेज मिर्च, काला चावल, फलों का जैम, अचार, शाल, कपड़े आदि उपलब्ध हैं।