‘ब्रेकथ्रू’ ने ‘यूथ चौपाल’ में जारी की सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट

0
153

Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 28 जून। स्वयंसेवी संस्था ब्रेकथ्रू द्वारा स्त्रीलिंक प्रोग्राम के अंतर्गत आज ‘यूथ चौपाल’ का आयोजन किया गया। डबुआ कालोनी स्थित भोजपुरी धर्मशाला में आयोजित यूथ चौपाल में हाल ही में ब्रेकथ्रू द्वारा की गई सेफ्टी आडिट की रिपोर्ट को डीसीपी,एनआईटी,फरीदाबाद, नितिश अग्रवाल द्वारा जारी की गयी।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल बनाना हम सब की जिम्मेदारी है। आने-जाने के रास्ते हों, सार्वजनिक परिवहन या फिर सार्वजनिक जगहें, यह रिपोर्ट बताती है कि महिलाएं और लड़कियां अपने को सुरक्षित नहीं महसूस करती हैं। और इन सब के पीछे कहीं न कहीं हमारी रूढ़िवादी सोच और वो परंपराएं हैं जो महिलाओं को कमतर मानती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं और लड़कियां बाजार से लेकर अपने कार्यस्थल, स्कूल जैसी जगहों पर बिना डरे आसानी से आ-जा सके इसके लिए हम लोगों को मिलकर आधारभूत संरचना जैसे स्ट्रीट लाइट,सड़कों आदि को उनको ध्यान में रखकर डेवलप करना होगा साथ ही उनके लिए सुरक्षित माहौल भी बनाना होगा। हमें लगता है इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हमारे युवाओं की है। क्योंकि वह हमारा भविष्य हैं और पीढ़ीगत बदलाव यही लेकर आएंगे। पुलिस अपने स्तर से महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने का प्रयास लंबे समय से कर रही है,इसके लिए समाज को भी जिम्मेदारी लेनी होगी।
कार्यक्रम में इंस्पेक्टर सविता रानी, इंचार्ज कम्युनिटी पुलिसिंग व सीनियर सिटीजन सेल ने बच्चों की हेल्पलाइन 1098 व सीनियर सिटीजन के लिए जारी की गई हेल्पलाइन 7290010000 के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने दुर्गा शाक्ति एप और साइबर क्राइम/ फ्राड की हेल्पलाइन 1930 और नशे के खिलाफ शिकायत के लिए 9050891508 के बारे में जानकारी देते हुए महिलाओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने के कानूनी पहलुओं की जानकारी भी दी।
इस अवसर पर ब्रेकथ्रू के स्त्रीलिंक प्रोग्राम की वरिष्ठ समन्वयक,प्रोग्राम, कृतिका कपिल ने बताया कि यह सेफ्टी ऑडिट डबुआ कालोनी में मार्च से मई माह के बीच में किया गया। इस ऑडिट के माध्यम से हमारा प्रयास था कि युवा खुद यह देखें कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए कौन-कौन कारक महत्वपूर्ण है और वह खुद इस ऑडिट के माध्यम से असुरक्षित रास्तों, परिवहन के साधन और आधारभूत संरचना की कमियों को जान सकें।

सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट- निष्कर्ष (की-फाइडिंग)
50 फीसदी सड़कों पर रोशनी की पार्याप्त व्यवस्था नहीं,कुछ गलियों में दिन में भी नहीं पहुंचती पर्याप्त रोशनी
सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि डबुआ की 50 फीसदी सड़कें अंधेरे से डूबी हुई, इन इलाकों में या तो स्ट्रीट लाइट फ्यूज हैं या फिर पेड़ों के बीच छिप गई है। जिसकी वजहों से महिलाएं शाम होने के बाद इन इलाकों में जाने से परहेज करती है,कुछ इलाकों की कई गलियां भी ऐसी है जहां बमुश्किल रोशनी पहुंचती है ऐसे में दिन में भी उस तरफ महिलाएं नहीं निकलना चाहती है। बढ़ती आबादी और अनियोजित विकास ने इस समस्या को बढ़ाने में अधिक योगदान दिया है।
सार्वजनिक परिवहन के साधनों की कमी
व्यवस्थित परिवहन तंत्र के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है। इन समुदायों की आधारभूत संरचना छोटी और लंबी दूरी के लिए परिवहन की तयशुदा सिस्टम का समर्थन नहीं करती है। कई महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर काम करती हैं या उनकी दैनिक दिनचर्या में सार्वजनिक स्थानों/परिवहन मार्गों से यात्रा करना शामिल है। अकसर देखा गया है कि उत्पीड़न के डर के कारण महिलाएं सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने से बचती हैं, जो संसाधनों और सेवाओं (जैसे, नौकरी, स्वास्थ्य और शिक्षा) तक पहुंच में सुधार के उद्देश्य से शहरी और बुनियादी ढांचे के कार्यक्रमों की सफलता को सीमित कर सकती हैं।
नियम का पालन मुश्किल :
कुछ स्थानों तक सीमित पहुंच और उनके अनियोजित विकास के कारण ये क्षेत्र किसी भी नियम पालन नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, समुदायों के भीतर शराब की दुकानें चल रही हैं, इलाकों में कुछ ब्लाइंड स्पॉट मौजूद हैं और चोर और चेन स्नैचर जैसे अवैध तत्व आराम से चलते हैं। पुलिस, चौकीदार, हेल्पलाइन नंबरों का प्रदर्शन, काम करने वाले कैमरे और रात में उचित रोशनी जैसे सुरक्षा उपायों की कमी है। हालांकि कुछ जगहों पर निजी सुरक्षा कैमरे देखे जा सकते थे,लेकिन ये पर्याप्त नहीं थे।
घर से स्कूल, काम पर जाना मुश्किल, सुरक्षित नहीं महसूस करती लड़कियां
युवा महिलाओं और लड़कियों को स्कूल, कॉलेज या काम के रास्ते में उत्पीड़न के अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं और लड़कियों ने नियमित रूप से पीछा किए जाने और मौखिक दुर्व्यवहार का सामना करने की बात कही है, जिसकी वजह से वह शिक्षा, आजीविका, गतिशीलता की स्वतंत्रता और निर्णय लेने की अपनी पहुंच खोने के डर से अपने परिवारों को इसके बारे में बताने में आत्मविश्वास महसूस नहीं करते हैं।
डर की वजह से आने-जाने के रास्ते बदल देती है महिलाएं
सड़कों पर डर और यौन उत्पीड़न की घटनाएं महिलाओं के व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। पुरुष द्वारा महिलाओं को गलत निगाह से देखने की व जह से उनके मन में शर्म,भय और चिंता को की भावना पैदा होती है,जिसकी वजह से वह सड़कों पर और अधिक सतर्क हो गई, बल्कि उन्हें अपनी सीमाओं को सीमित करने के लिए भी मजबूर किया गया। सार्वजनिक स्थानों का उपयोग, या यहां तक ​​कि उनको अपने आने-जाने के रास्तों को बदलना पड़ा।

हिंसा से बचने के लिए महिलाओं नहीं पहनती मनपसंद कपड़े
अवाइड करना (टालना) उन प्रमुख व्यवहार परिवर्तनों में से एक है जिसे महिलाएं मानती हैं। महिलाएं सड़कों का उपयोग करते समय परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ रहना पसंद करती हैं,अनुचित ध्यान से बचने के लिए ऐसे कपड़े पहनती हैं, जो बहुत ढीले-ढाले होते हैं और शरीर के अधिकांश हिस्सों को कवर करते हैं,जैसे पूरी बाजू, सलवार-कमीज आदि।
बदलाव के लिए उठाने होंगे कदम
सेफ्टी ऑडिट के दौरान समुदाय के तरफ से कुछ सिफारिशे आई जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षित स्पेस बनाने में मदद मिलेगी।
1-रास्तों पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था
2-पार्क का रख-रखाव बेहतर हो जिससे समुदाय के लोग अपने को सुरक्षित महसूस करें।
3-यातायात के साधन बढ़ाएं जाएं।
4-नशे पर रोक खास तौर से सार्वजनिक स्थानों पर नशा करना पूरी तरह से रोका जाए।
5-असुरक्षित जगहों पर पुलिस की निगरानी (पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
6-शैक्षणिक स्थानों पर लड़कियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
7-हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
8-समाज भी महिलाओं के साथ सार्वजनिक जगहों पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी प्रयास करे।
9-स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था की जाए।
इस अवसर पर ब्रेकथ्रू के असिसटेंट मैनेजर,प्रोग्राम,फरमान ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए हमें सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट में निकल कर आए मुद्दों पर प्रभावी तरीके से काम करना होगा। आधारभूत संरचना से लेकर, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन के साधनों के साथ सुरक्षित जगहों का निर्माण भी करना होगा लेकिन सबसे पहले हमें महिलाओं को कमतर मानने की रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा तभी एक समान समाज का निर्माण हो सकेगा।
यूथ चौपाल में नुक्कड़ नाटक पहल का आयोजन किया गया जिसके माध्यम से एक समानता वाला समाज बनाने पर जोर दिया गया। इसके साथ मन के रेलगाड़ी पर नृत्य प्रस्तुति प्रतिभागियों द्वारा दी गई। इस दौरान ‘काम करती’ और ‘नज़र’ लघु फिल्मों की वीडियो स्क्रीनिंग भी हुई। कार्यक्रम में पार्षद महावीर भड़ाना,आरडब्लूए मेंबर राकेश खटाना सहित काफी संख्या में स्थानीय गणमान्य व्यक्ति और युवा शामिल हुए।