धान की पराली को जलाना नहीं बल्कि बचाना है : उपायुक्त यशपाल

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 21 अक्टूबर। उपायुक्त यशपाल ने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए धान की पराली को जलाने की बजाए उसका संरक्षण करना होगा। इससे हमें पशुओं के लिए चारा भी मिलेगा और खेतों के लिए अच्छी खाद। उपायुक्त बुधवार को जिला के गांव चंदावली में जिला स्तरीय किसान जागरूकता कैंप में किसानों को संबोधित कर रहे थे। कैंप में जिला के सभी सरपंचो व प्रगतिशील किसानों को आमत्रित किया गया था।
इस दौरान संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को व्यक्तिगत कृषि यन्त्र पर 50 प्रतिशत व किसान समूह को 80 प्रतिशत तक अनुदान सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। इनमें हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिपर बाईंडर, स्ट्रा मल्चर, स्ट्रा चापर और जीरो टीलेज मशीन शामिल है। उन्होंने कहा कि इन कृषि यंत्रों का प्रयोग कर हम धान की पराली को बचा सकते हैं। उन्होंने किसानों को पराली जलाने से होने वाले जीव जन्तुओ की सेहत पर बुरे असर की जानकारी भी दी।
उपायुक्त ने किसान भाईयो को कोविड 19 में सर्तक रहने के साथ-साथ हिदायत दी कि सभी को 2 गज की दूरी का ध्यान रखना चाहिए व मास्क अवश्य लगाना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डा. डा. लक्षमण व डा0 रेखा दहिया ने किसानों को पराली को पशु के चारा के रूप में उपयोग में लाने की सलाह दी। प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ ओमकार सिंह ने बताया की फसल अवशेष जलाने पर सरकार की हिदायत अनुसार किसान का चालान व एफआईआर भी की जा सकती है। इसके लिए 2500 रुपये प्रति एकड के हिसाब से जुर्माने के प्रावधान के  बारे मे भी बताया ।
उप कृषि निदेशक डा0 अनिल कुमार ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से गलोबल बोर्मिंग होती है। फसल अवशेष जलाने से कार्बनडाई आक्साईड गैस की बढोतरी होती है। जिससे धरती का तापमान बढता है। जिसके आगे चलकर दुष प्रभाव मानव जाति को ही भुगतने पडेंगे।
इस कैंप मे डा. श्रीकृष्ण वर्मा, डा. हर हरिश यादव, डा. अरूण दहिया, डा. आनन्द, सभी कृषि अधिकारी, बीटीएम, एटीएम ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।