इस्कॉन फरीदाबाद द्वारा वार्षिक “जगन्नाथ रथयात्रा” के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा का आयोजन

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj :
भगवान् जगन्नाथ रथयात्रा का बहुत ही विशेष महत्व है। जगन्नाथ रथ यात्रा महामहोत्सव का इतिहास सदियों पुराना है। इस उत्सव को भगवान श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) के साथ उनके भाई और बहन (बलराम और सुभद्रा) के साथ उनकी युवावस्था की लीलास्थली वृंदावन वापसी जाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस्कॉन के संस्थापकाचार्य श्रील ए.सी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने सन् 1965 के बाद से विश्व के लगभग सभी देशों में इसकी शुरुआत की। श्रीला प्रभुपाद जी ने रथयात्रा की बहुत ही सरल व्याख्या की कि हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य हमारे ह्रदय में भगवान के प्रकट होने के लिए उपयुक्त स्थान बनाना है। रथयात्रा कृष्ण को हमारे हृदय में वापस लाने की साधना है। कृष्ण सभी जीवित प्राणियों के ह्रदय में वास करते हैं, लेकिन हम उन्हें भूल गए हैं। आध्यात्मिक जीवन का मुख्य उद्देश्य हमारे ह्रदय को भगवान के लिए स्वयं को प्रकट करने के लिए एक उपयुक्त स्थान बनाना है। अगर हम भगवान को अपने ह्रदय में प्रकट होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं तो यह साफ होना चाहिए। लेकिन अगर हमारे ह्रदय में वासना, ईर्ष्या, अहंकार, लालच, क्रोध और भ्रम की गंदगी जमा है तो वह हमारे ह्रदय में प्रकट होने में प्रसन्न नहीं होंगे। इस संसार में सभी महान आध्यात्मिक वर्गों का एकमात्र उद्देश्य है एक दूसरे की ईमानदारी से सहायता और ईमानदारी से अपने ह्रदय को स्वच्छ करना, नम्रता, दान, भगवान के लिए प्यार और सभी प्राणियों के लिए करुणा पैदा करना है।
हमारे राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने कहा कि “इस्कॉन को 100 से अधिक देशों में 180 से अधिक रथयात्रा उत्सवों को मनाने के लिए बधाई देना चाहता हूं। यह प्रतिभागियों को उनकी राष्ट्रीयता, जाति, लिंग या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना आकर्षित करके वसुधैव कुटुम्बकम के सदियों पुराने सिद्धांत का उदाहरण देता है। मैं इस शुभ अवसर पर सभी भक्तों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।”
इस्कॉन फरीदाबाद के अध्यक्ष श्री गोपीस्वर दास जी का यह कहना है कि “यदि कोई व्यक्ति भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा को रथ पर आरूढ़ हुआ जाते हुए देखता है तब लाखों जन्मों के उसके पाप तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं। भगवान जगन्नाथ जीवों के प्रति अति दयालु हैं। जो भी उनके दर्शन करता है वे उस व्यक्ति का निश्चित रूप से उद्धार करते हैं। रथयात्रा को देखने, रथ को खींचने, रथयात्रा में भगवान के पवित्र नामों का जप व कीर्तन करने व भगवान जगन्नाथ जी का महाप्रसाद ग्रहण करने से मनुष्य के लाखों जन्मों के पाप तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं और वे धीरे-धीरे भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर होने लगते हैं। जो मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य है।” इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस उत्सव का आयोजन किया गया। ताकि अधिकाधिक लोग भगवान जगन्नाथ जी की कृपा प्राप्त कर सकें।
इस शोभायात्रा का आयोजन सायं 5 बजे बहुत ही धूमधाम से कीर्तन, नृत्य व प्रसाद वितरण द्वारा सराय से शुरू होकर इस्कॉन मंदिर, सेक्टर 37 फरीदाबाद में समापन हुआ। इस शोभायात्रा में लगभग 500 से अधिक भक्तों ने बहुत ही हर्षोल्लास से भाग लिया।