निरंकारी मिशन के केन्द्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन खेमराज चढ्ढा जी ब्रह्मलीन

0
458

Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : संत निरंकारी मण्डल अत्यन्त खेद पूर्वक सूचित कर रहा है कि निरंकारी मण्डल के महान विद्वान, समर्पित संत, एवं निस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति आदरणीय खेमराज चढ्ढा जी (केन्द्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन) दिनांक 29 नवम्बर 2020 को रात्रि 9 बजकर 50 मिनट पर 90 वर्ष की आयु में नश्वर शरीर का त्याग कर ब्रह्मलीन हो गये। आदरणीय चढ्ढा साहब जी के ब्रह्मलीन होने से जो रिक्तता एवं शून्य उत्पन्न हुआ है उसकी आपूर्ति सम्भवत: सम्भव नहीं है।
आदरणीय खेमराज चढ्ढा जी बाल्यावस्था से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने तत्कालीन सद्गुरू शहंशाह बाबा अवतार सिंह जी से 17 सितम्बर 1948 को ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया एवं मिशन की विचारधारा को जी कर ज्वलन्त उदाहरण प्रस्तुत किया। वह सदैव कहते थे कि जैसा हमारा कर्म हो वैसे ही हमारे बोल हो, जैसे हमारे बोल हों वैसा हमारा कर्म होना चाहिये। वह बोलने से पूर्व कर्म पर विश्वास रखते थे तथा मिशन के प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता, लेखक, कवि एवं कुशल प्रबन्धक भी थे। आपके शब्दों एवं कर्म में सदैव विनम्रता का भाव निहित रहता था।
आदरणीय खेमराज चढ्ढा जी वर्तमान समय में मण्डल के केन्द्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन पद पर कार्यरत थे एवं कई दशकों से अनेक प्रबन्धकीय भूमिकायें निपुणता पूर्वक निभाते रहे। प्रबन्धकीय कार्यों को इतनी सहजता एवं प्रेमपूर्वक अंजाम दिया कि उनके व्यक्तित्व ने प्रत्येक भक्त के दिल में एक अमिट छाप बनायी एवं इतना गहरा प्रभाव था कि उन्हें सभी प्रेम एवं सम्मान देते हुये चढ्ढा साहब कहकर सम्बोधित करते थे।
वे वर्षों तक संत निरंकारी मण्डल की कार्यकारिणी समिति के विभिन्न विभागों जैसे सेवादल, विदेश प्रबन्धन एवं प्रकाशन आदि में मेम्बर इंचार्ज के रूप में सेवारत रहे। संत निरंकारी वार्षिक संत समागमों में संयोजक के रूप में निरंतर सेवा निभाई। समागम को सुन्दर एवं सुव्यवस्थित रूप देने में उनकी सदैव अहम भूमिका रही। उन्होंने तत्कालीन सद्गुरू शहंशाह बाबा अवतार सिंह जी, बाबा गुरबचन सिंह जी, बाबा हरदेव सिंह जी, सद्गुरू माता सविन्दर हरदेव जी महाराज एवं निरंकारी राजमाता जी के स्नेह एवं आर्शीवाद के प्राप्त किये। गत दो वर्षों से सद्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रत्येक आदेश का अनुपालन करके आर्शीवादों के निरन्तर पात्र बने ंरहे।
यद्यपि हम सभी भौतिक रूप से उनकी रिक्तता का अहसास करते रहेगें परन्तु उनका महान जीवन, अतुल्य योगदान एवं उनकी शिक्षायें निरन्तर हमें प्रेरित करती रहेगीं और आने वाली पीढियाँ भी उनके सद्गुरू के प्रति सम्पूर्ण समर्पण, निश्छल एवं निष्काम भाव से की गयीं मानव समाज की सेवायें सदैव याद करेंगी।
आप सभी से विनम्र निवेदन है कि देश की परिस्थितियों को देखते हुये अपने घरों से ही परिवार के प्रति संवदेनायें व्यक्त करें।