मानव रचना ने आभासी सत्र की श्रृंखला और एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ “विश्व पर्यावरण दिवस” मनाया

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 5 जून डॉ. एम.पी पूनिया, वाइस चेयरमैन, एआईसीटीई, मानव रचना विश्वविद्यालय के ई-पत्रिका ‘अल्युरेंस’ के पहले संस्करण के अनावरण और लॉन्च में शामिल हुए, जहां उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, “आज हम सभी उस कगार पर हैं जहां पर्यावरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है और मानव रचना के मंच पर यहां आकर मुझे खुशी हो रही है, जहां नाम ही कहता है कि छात्र न केवल डिग्री और रोजगार के लिए बल्कि इस दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए काम कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि मानव रचना एक ऐसा विश्वविद्यालय है जो काम कर रहा है न सिर्फ शिक्षा के लिए बल्कि शांति और स्थिरता के लिए भी”

शारजाह विश्वविद्यालय, संयुक्त अरब अमीरात; शारीरिक शिक्षा और खेल पर यूक्रेन का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, नैशेर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड असियाह पॉलिटेक्निक, इंडोनेशिया, कहाया पद्मा कुमारा फाउंडेशन, इंडोनेशिया के सहयोग से मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय द्वारा ‘खेल पुनर्वास में हालिया प्रगति और चुनौतियां’ पर एक तीन दिवसीय आभासी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। कुल 8 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध वक्ताओं ने इस ऐतिहासिक आभासी सम्मेलन को समर्थन दिया है। प्रतिष्ठित हस्तियों और लगभग 400 प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच सम्मेलन का उद्घाटन किया गया।

उद्घाटन सत्र के अगले चरण में, शारीरिक शिक्षा और खेल पर यूक्रेन का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, नैशेर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड असियाह पॉलिटेक्निक, इंडोनेशिया, कहाया पद्मा कुमारा फाउंडेशन, इंडोनेशिया तथा MRIIRS के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। ऐसे ऐतिहासिक निर्णय छात्रों को आगे बढ़ने के लिए कई अवसर प्रदान करते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ. ओ पी भल्ला फाउंडेशन ने ‘सपोर्टिंग सस्टेनेबल एनवायरनमेंट’ विषय पर एक वेबिनार का भी आयोजन किया, जिसमें टीम इको क्लब अतिथि वक्ता के रूप में शामिल हुआ। फाउंडेशन ने आज बटरफ्लाई गार्डन में कुछ और पेड़ भी लगाए। ये पौधे विशेष प्रजातियां हैं जो निकट भविष्य में तितलियों को आकर्षित करेंगे और इसलिए तितली उद्यान बनाने का मार्ग सुनिश्चित करेंगे।

उद्योग और शिक्षा जगत के दिग्गज भी आज ‘वर्चुअल वाटर – भारत में मुद्दे और नीतिगत निहितार्थ’ पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए। वर्चुअल वाटर से तात्पर्य उस पानी से है जो वस्तुओं में समाया हुआ है। आभासी पानी आर्थिक व्यापार और सूखा-प्रूफिंग में एक भूमिका निभाता है और इसके मुद्दे पानी के विवादास्पद अंतर-बेसिन/अंतर-क्षेत्र हस्तांतरण से संबंधित हैं। डॉ. दीपांकर साहा, चेयर प्रोफेसर, सीएडब्ल्यूटीएम, MRIIRS और सलाहकार, जल नीति, पीएनपी ने सम्मानित सभा के साथ अपने अमूल्य विचार साझा किए और उन सभी को प्रेरित किया जो बेहतर कल के लिए आज एक स्टैंड लेने के लिए उपस्थित थे।