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Faridabad NCR

सर्वोदय हेल्थकेयर ने युवा भारतीयों में फैटी लीवर के खतरनाक रूप से बढ़ने पर चेतावनी दी, ग्लोबल फैटी लीवर डे 2026 पर इस साइलेंट लाइफस्टाइल महामारी पर बढ़ाई जागरूकता

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Faridabad Hindustanabtak.com/Dinesh Bhardwaj : 1 जुलाई। सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर 8, फरीदाबाद ने ग्लोबल फैटी लीवर दिवस 2026 के अवसर पर एक पब्लिक अवेयरनेस पहल की। इस पहल का उद्देश्य युवा भारतीयों में फैटी लीवर की बीमारी के बढ़ते बोझ पर लोगों का ध्यान खींचना था। डॉक्टरों ने इसे मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से फैली एक “साइलेंट एपिडेमिक” बताया है। इस पहल का फोकस नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (NAFLD) के बारे में जागरूकता बढ़ाना और शुरुआती स्क्रीनिंग और लाइफस्टाइल पर आधारित इलाज के महत्व पर ज़ोर देना था।

इस पहल के तहत फरीदाबाद के सेक्टर 8 में सर्वोदय हेल्थकेयर ने ‘द लीवर हेल्थ डायलॉग’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मेडिकल एक्सपर्ट्स, नागरिक और मीडिया के प्रतिनिधि फैटी लीवर की बीमारी के बढ़ते मामलों और इसके जनता के स्वास्थ्य हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए।

कार्यक्रम में उपस्थित मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि अब फैटी लीवर की बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं होती हैं बल्कि इससे अब 20s और 30s की उम्र वाले भी ग्रसित हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने इस बदलाव की वजह सुस्त लाइफस्टाइल, खराब खान-पान, बढ़ते मोटापे और मेटाबोलिक डिसऑर्डर को बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति अक्सर तब तक बिना लक्षण के रहती है जब तक कि यह फाइब्रोसिस या लीवर डैमेज जैसे एडवांस स्टेज तक न पहुंच जाए।

द लैंसेट रीजनल हेल्थ, साउथईस्ट एशिया में पब्लिश हुई फेनोम इंडिया-CSIR हेल्थ स्टडी (2025–2026) से हाल ही में भारत के खास ग्रुप के परिणामों के अनुसार, लगभग 38 से 40% भारतीय वयस्क मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लीवर डिज़ीज़ (MASLD) से प्रभावित हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा पहले से ही फाइब्रोसिस के शुरुआती लक्षण से ग्रसित है। यह लीवर के और गंभीर नुकसान की ओर बढ़ने का संकेत देता है। 7,000 से ज़्यादा प्रतिभागियों के मल्टी-सिटी डेटा पर आधारित यह स्टडी, मोटापा, डायबिटीज़, फिजिकल इनएक्टिविटी और शहरी लाइफस्टाइल को इस बढ़ते बोझ के लिए जिम्मेदार मानती है, खासकर वर्किंग-एज और युवा आबादी में यह बीमारी इसी वजह से बढ़ रही है। यह भारत में काफी हद तक चुपचाप और लाइफस्टाइल से होने वाली लीवर बीमारी की महामारी की ओर संकेत देती है।

अपने संबोधन में मुख्य भाषण देते हुए एयर Cmde (डॉ.) भास्कर नंदी, डॉयरेक्टर और प्रमुख- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एंडोस्कोपी, सर्वोदय हॉस्पिटल सेक्टर-8, फरीदाबाद ने कहा, “फैटी लीवर बीमारी अब किसी खास उम्र के लोगों यानी सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह रही है। यह कम उम्र के लोगों में भी तेजी से फैल रही है। ऐसा होने का मुख्य कारण सुस्त लाइफस्टाइल, गलत खान-पान की आदतें, मोटापा और मेटाबोलिक डिसऑर्डर है। इस बीमारी में चिंताजनक बात यह है कि यह अक्सर बिना किसी खास लक्षण के बढ़ती है। शुरुआती स्क्रीनिंग, समय पर इलाज और लाइफस्टाइल में टिकाऊ बदलाव बीमारी को बढ़ने से रोकने और लंबे समय तक लीवर की सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस उभरती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए ज्यादा जागरूकता और पहले से स्वास्थ्य की जांच करवाना बहुत जरूरी हैं।”

सर्वोदय हेल्थकेयर के चेयरमैन डॉ राकेश गुप्ता ने कहा, “दशकों से भारत की हेल्थकेयर चुनौतियाँ ज़्यादातर संक्रामक बीमारियों और कम पोषण की वजह से थीं। अब जैसे-जैसे लाइफस्टाइल बदली है और शारीरिक गतिविधि कम हुई है, हम डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी और फैटी लीवर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों का बोझ बढ़ता हुआ देख रहे हैं। चिंता की बात यह है कि फैटी लीवर उन लोगों में भी हो सकता है जो शराब नहीं पीते हैं, अक्सर ज़्यादा कैलोरी का सेवन करते हैं, मोटापे और आराम से रहते हैं। इस साइलेंट बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ लाइफस्टाइल, नियमित जांच और बचाव के हेल्थकेयर उपायों को बढ़ावा देना, लंबे समय तक लीवर की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।”

इस कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा हुई जिसमें एयर Cmde (डॉ.) भास्कर नंदी, डायरेक्टर और हेड– गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एंडोस्कोपी, सर्वोदय अस्पताल; डॉ. मृदुल चंद्र दास, वरिष्ठ कंसलटेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी; डॉ. मनोज, कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी; डॉ. विष्णु देव, एसोसिएट कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी; और सुश्री रितिका, क्लिनिकल डाइटिशियन के साथ-साथ हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा उपस्थित लोगों ने भाग लिया और लीवर के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता, रोकथाम और जल्दी पता लगाने वाले चर्चा में शामिल हुए। चर्चा में रोकथाम रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जैसे बेहतर खाने की आदतें, नियमित शारीरिक गतिविधि, नियमित स्वास्थ्य जांच और निवारक देखभाल प्रथाओं में लीवर स्वास्थ्य जांच को शामिल करना आदि पर जोर दिया गया।

इस पहल की एक खास बात थी कि प्रतिभागियों के लिए फ्री फाइब्रोस्कैन स्क्रीनिंग, BCA (बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस) टेस्ट और फ्री डाइटीशियन कंसल्टेशन की सुविधा थी। इससे लीवर की जकड़न का रियल-टाइम मूल्यांकन हो सका और लोगों को अपने लीवर की सेहत की स्थिति और खतरे के स्तर को समझने में मदद मिली। ऑन-साइट मेडिकल एक्सपर्ट्स ने स्क्रीनिंग के नतीजों के आधार पर मौजूद लोगों को फॉलो-अप केयर और लाइफस्टाइल में बदलाव के बारे में भी जानकारी दी।

हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने दोहराया कि शहरी भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी लीवर की बीमारियां एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन रही हैं। उन्होंने एडवांस्ड लीवर की बीमारी के बोझ को कम करने के लिए ज़्यादा जागरूकता और शुरुआती डायग्नोस्टिक पहल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इस पहल में कम्युनिटी के सदस्यों, हेल्थकेयर स्टेकहोल्डर्स और मीडिया रिप्रेजेंटेटिव्स ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यह लीवर स्वास्थ्य को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता को दिखाता है। कार्यक्रम का अंत कम्युनिटी रिप्रेजेंटेटिव और इवेंट कोऑर्डिनेटर श्री राकेश त्यागी के धन्यवाद प्रस्ताव और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन रिप्रेजेंटेटिव, श्रीमती अमृता श्रीवास्तव और कम्युनिटी लीडर और हेल्थ एडवोकेट, कैप्टन पी. एल. नाहर (रिटायर्ड) सहित कम्युनिटी कंट्रीब्यूटर्स को सम्मान देने के साथ हुआ।

द लिवर हेल्थ डायलॉग जैसी पहल के ज़रिए सर्वोदय हेल्थकेयर गैर-संक्रामक (नॉन-कम्युनिकेबल) बीमारियों के बारे में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, जल्दी पता लगाने और समाज को जागरूक करने पर अपना फोकस मज़बूत कर रहा है।

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