राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कार्यान्वयन में शिक्षण संस्थानो के समक्ष आधारभूत सुविधा की कमी सबसे बड़ी  चुनौती: कुलपति 

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Faridabad Hindustan ab tak/Dinesh Bhardwaj : 4 अक्टूबर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कार्यान्वयन में शिक्षण संस्थानो के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती संस्थानो में आधारभूत सुविधाओं की कमी है यह बात जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कुलपति प्रोफ़ेसर सुशील कुमार तोमर ने फ़रीदाबाद पंचनद शोध संस्थान केंद्र द्वारा आयोजित गोष्ठी में अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कही। गोष्ठी का विषय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में शिक्षण संस्थानों के समक्ष चुनौतियां’ था। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 दोनो ही छात्र की अभिरुचि के अनुसार शिक्षा प्रदान करने की वकालत करते है लेकिन हमारे शिक्षण संस्थानो में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी  इसके सफल  कार्यान्वयन में कारक है। पहला जैसे अगर कोई विज्ञान का छात्र म्यूजिक मे रूचि रखता है तो क्या संस्थान उसके टाइम टेबल के अनुसार म्यूजिक कक्षा की व्यवस्था कर पाएगा । दूसरा अगर ऐसे छात्रों की संख्या बढ़ जाती है तो क्या उक्त संस्थान उनके लिए संगीत यँत्र तथा अन्य ज़रूरी संसाधनो जैसे संगीत अध्यापक  एवं स्पेस समय पर मुहिया करा पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में 18 से 22 साल के स्कूल छोड़ने वाले बच्चों संख्या काफ़ी अधिक है। जिसको तभी कम किया जा सकता है जब शिक्षण संस्थान उन बच्चों में फिर से पढ़ने की रूचि पैदा करें। तथा उनकी सुविधानुसार पढ़ने के अवसर प्रदान करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ऐसे बच्चों के लिए मुफ़्त एग्जिट और रिज्यूम दोनों अवसर प्रदान करती है।
गोष्ठी में विषय प्रस्तोता के रूप में पधारे दिल्ली  विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर निरंजन कुमार ने कहा कि  नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। प्रस्तोता ने आगे कहा कि पिछले 100 सालों में बाहरी ताक़तों ने हमारी मानसिकता पूरी तरीक़े  से बदल दी है  जिस कारण हम अपना इतिहास एवं संस्कृति पूरी तरह  से भूल गए है। अगर कोई हमें कुछ कहता है तो वह हमें नया लगता है जबकि वह हमारे वेदों मे पहले से ही निहित है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारा संस्कृत भाषा से अनभिज्ञ होना है। जबकि हमारे  वेद और ग्रंथ संस्कृत भाषा मे है। इन भाषाओं को पुनः याद कराने के लिए  नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में प्रावधान है। नई शिक्षा नीति में तीन तरीके के शिक्षण संस्थान देश के अंदर स्थापित करने की वकालत की गई है जिनमे पठन-पठान मातृभाषा में कराया जाएगा तथा उनमे प्राकृत, पाली और संस्कृत  भाषा का ज्ञान भी दिया जाएगा ।
गोष्ठी में डीएवी शताब्दी कॉलेज की प्रिन्सिपल डॉक्टर सविता भगत ने कहा कि हर इंस्टिट्यूट के पास अपने सीमित साधन है जो नीति के  सफल कार्यान्वयन में सबसे बड़ी चुनौती है जिसके समाधान के लिए विश्वविद्यालयों को ऐसे शिक्षण संस्थानो की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। फ़रीदाबाद स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय के प्रिन्सिपल डॉक्टर मोहेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के  क्रियान्वयन को लेकर शिक्षण संस्थानो को गहन सोच विचार करने की आवश्यकता है। गोष्ठी में बालाजी कॉलेज के निदेशक डॉक्टर जगदीश चौधरी ने भी नई शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन पर अपने विचार रखे।
गोष्ठी में फ़रीदाबाद के दस कॉलेज के शिक्षकों एवं छात्रों ने भाग लिया। गोष्ठी में श्रोताओं के जिज्ञासा समाधान के लिए प्रश्नोत्तर काल भी रखा गया। गौतलब है कि पंचनद शोध संस्थान देश के शिक्षण संस्थानो एवं सामाजिक संस्थाओ के साथ मिलकर इस तरह की गोष्ठी हर माह आयोजित करता रहता है जिनमे आम जन से जुड़े समसमाहिक विषयों पर खुलकर संवाद होता है।